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RTI में बड़ा खुलासा: सवर्ण आयोग ने ‘भूमिहार ब्राह्मण’ से ब्राह्मण शब्द हटाने की नहीं की थी अनुशंसा

RTI में सामने आया कि सवर्ण आयोग ने भूमिहार ब्राह्मण का नाम बदलकर केवल भूमिहार करने की अनुशंसा नहीं की थी। बिहार में जाति के आधिकारिक नाम को लेकर नई बहस शुरू।

8 August 2026 at 9:42 pmPatna, Bihar, India117 views0 comments
RTI में बड़ा खुलासा: सवर्ण आयोग ने ‘भूमिहार ब्राह्मण’ से ब्राह्मण शब्द हटाने की नहीं की थी अनुशंसा

पटना, 8 अगस्त 2026: बिहार में ‘भूमिहार ब्राह्मण’ जाति के आधिकारिक नाम को लेकर चल रही बहस के बीच एक महत्वपूर्ण जानकारी सामने आई है। सूचना के अधिकार यानी RTI के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार, सवर्ण आयोग ने कथित तौर पर कभी भी ‘भूमिहार ब्राह्मण’ का नाम बदलकर केवल ‘भूमिहार’ करने की अनुशंसा नहीं की थी।

दैनिक भास्कर में 8 अगस्त 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, उच्च जातियों के विकास के लिए गठित राज्य आयोग, जिसे पहले सवर्ण आयोग के नाम से जाना जाता था, की ओर से सामान्य प्रशासन विभाग को ऐसी कोई सिफारिश भेजे जाने का रिकॉर्ड नहीं मिला है।

यह जानकारी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि पिछले कुछ समय से बिहार में भूमिहार समाज के आधिकारिक जाति नाम में ‘ब्राह्मण’ शब्द जोड़े जाने या हटाए जाने को लेकर राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज है।

विधानसभा में सरकार ने सवर्ण आयोग की सिफारिश का दिया था हवाला

मामले ने उस समय ज्यादा राजनीतिक महत्व हासिल किया जब 24 जुलाई 2026 को बिहार विधानसभा में इस विषय पर चर्चा हुई।

रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सरकार की ओर से उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने विधानसभा में कहा था कि सवर्ण आयोग की अनुशंसा के आधार पर ‘भूमिहार ब्राह्मण’ का नाम बदलकर ‘भूमिहार’ किया गया था।

उन्होंने यह भी संकेत दिया था कि फिलहाल इसे पुनः बदलने का कोई प्रस्ताव सरकार के पास नहीं है।

अब RTI से सामने आई जानकारी ने इस दावे को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

आयोग के रिकॉर्ड में ऐसी अनुशंसा नहीं

प्रकाशित रिपोर्ट में उच्च जातियों के विकास के लिए राज्य आयोग के चेयरमैन डॉ. महाचंद्र प्रसाद सिंह के हवाले से कहा गया है कि आयोग के रिकॉर्ड की जांच कराई गई है।

उनके अनुसार, आयोग ने ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम को बदलकर केवल ‘भूमिहार’ करने की कोई अनुशंसा नहीं की थी।

आयोग की ओर से भूमिहार ब्राह्मण नाम से संबंधित साक्ष्य और दस्तावेज भी सामान्य प्रशासन विभाग को भेजे जाने की बात सामने आई है।

अगर आयोग की ओर से वास्तव में ऐसी कोई सिफारिश नहीं की गई थी, तो सबसे बड़ा सवाल यह बनता है कि आखिर सरकारी रिकॉर्ड में नाम परिवर्तन का आधार क्या था।

सामान्य प्रशासन विभाग की भूमिका पर उठे सवाल

समाचार रिपोर्ट के अनुसार, विधानसभा में सरकार का पक्ष सामान्य प्रशासन विभाग से उपलब्ध कराई गई जानकारी पर आधारित था।

उपमुख्यमंत्री विजेंद्र प्रसाद यादव ने भी स्पष्ट किया कि विभागीय अधिकारियों द्वारा जो जानकारी उपलब्ध कराई गई, उसी आधार पर उन्होंने विधानसभा में जवाब दिया था।

लेकिन RTI के माध्यम से सामने आई जानकारी और आयोग के पक्ष के बाद अब यह स्पष्ट किए जाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है कि ‘भूमिहार ब्राह्मण’ से ‘ब्राह्मण’ शब्द हटाने का वास्तविक प्रशासनिक आदेश किस आधार पर लिया गया था।

2015 से जुड़े रिकॉर्ड पर भी सवाल

इस पूरे मामले का एक और महत्वपूर्ण पहलू वर्ष 2015 से जुड़ा बताया जा रहा है।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लंबे समय से नाम परिवर्तन के पीछे आयोग की रिपोर्ट को आधार बताया जाता रहा, जबकि RTI से प्राप्त जानकारी में संबंधित अनुशंसा का रिकॉर्ड आयोग के पास नहीं मिला।

यदि यह स्थिति आधिकारिक रिकॉर्ड से पुष्ट होती है, तो मामला केवल जाति के नाम तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह सरकारी दस्तावेजों, प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया और रिकॉर्ड की सत्यता से भी जुड़ सकता है।

भाजपा विधायक जीवेश मिश्रा ने विधानसभा में उठाया था मुद्दा

‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम का मुद्दा बिहार विधानसभा में भाजपा विधायक और पूर्व मंत्री जीवेश मिश्रा द्वारा भी उठाया गया था।

उन्होंने सरकारी और जमीन से संबंधित दस्तावेजों में जाति का नाम ‘भूमिहार ब्राह्मण’ दर्ज किए जाने की मांग की थी।

इसके बाद सरकार की ओर से दिए गए जवाब को लेकर राजनीतिक विवाद बढ़ गया और यह मुद्दा भूमिहार समाज के बीच भी व्यापक चर्चा का विषय बन गया।

क्यों महत्वपूर्ण है ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम का सवाल?

भूमिहार समुदाय में एक बड़ा वर्ग लंबे समय से अपनी सामाजिक और ऐतिहासिक पहचान को ‘भूमिहार ब्राह्मण’ नाम से जोड़ता रहा है।

इस कारण सरकारी रिकॉर्ड में केवल ‘भूमिहार’ अथवा ‘भूमिहार ब्राह्मण’ लिखे जाने का प्रश्न समाज के लिए केवल शब्दों का अंतर नहीं, बल्कि ऐतिहासिक पहचान और आधिकारिक मान्यता से जुड़ा विषय माना जाता है।

इसी वजह से यह मुद्दा अब बिहार की राजनीति के साथ-साथ सामाजिक संगठनों और भूमिहार समाज के बीच भी महत्वपूर्ण बन गया है।

अब आगे क्या?

RTI के माध्यम से सामने आई जानकारी के बाद अब सामान्य प्रशासन विभाग से यह स्पष्ट किए जाने की अपेक्षा बढ़ सकती है कि नाम परिवर्तन का निर्णय किस दस्तावेज, आदेश अथवा अनुशंसा के आधार पर किया गया था।

साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि सरकार भविष्य में आधिकारिक दस्तावेजों में ‘भूमिहार’ या ‘भूमिहार ब्राह्मण’ में से किस नाम को मान्यता देती है।

इस मामले से संबंधित कोई नया सरकारी आदेश या आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

स्रोत संदर्भ: यह समाचार 8 अगस्त 2026 को दैनिक भास्कर, पटना में प्रकाशित रिपोर्ट तथा उसमें उल्लेखित RTI जानकारी के आधार पर तैयार किया गया है।

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